बड़हिया के वंशज

इस इतिहास के नायक का गोत्र शांडिल्य है मूल दिघवै और जाति के भूमिहार ब्राहण है यह मिथिला के दिघवागढ थाना मसरख जिला सारण से आये है। कथाओं के अनुसार इनके पूर्वज दो भार्इ श्री जय जय ठाकुर और श्री पृथु ठाकुर पहले पहले गांव में आकर बसे और श्री जय जय ठाकुर के वंश से बाबा प्राण ठाकुर हुए परन्तु पृथु ठाकुर से प्राण ठाकुर तक की वंशावली का पता नहीं चलता। इन्ही श्री प्राण ठाकुर का वंश आगे चलकर वृहद रूप में बड़हिया का निर्माण किया जो आज का यह रूप है। यानि श्री प्राण ठाकुर बड़हिया के बीज पुरुस हुए। { कॉपीराइट- बड़हिया डॉट कॉम © www.barahiya.com, ©बड़हिया डॉट कॉम ©www.barahiya.com }

बाबा प्राण ठाकुर के वंश की बारह शाखाओं में गणना की जाती हैं। इन्ही बाबा प्राण ठाकुर के बारह वंशजों के नाम पर बड़हिया के बारह टोला है। बारह में प्रत्येक के नाम से एक तैाजी कायम हुआ और उनकी सम्पति उनके नाम से प्रसद्धि हुर्इ। ये टोले निम्नलिखित है:

1. बाबा इन्द टोला 2. बाबा दानी टोला 3. बाबा शिव टोला 4. बाबा गोपीनाथ टोला
5. बाबा गौड़ टोला 6. बाबा श्याम टोला 7. बाबा प्रयाग टोला 8. बाबा दुखहरण टोला
9. बाबा रामचरण टोला 10. बाबा धनराज टोला 11. बाबा रामसेन टोला 12. बाबा श्री कंठ टोला

ये बारह श्री प्राण ठाकुर के ही वंशज है मगर विभिन्न पीढीयो के।

श्री गोपीनाथ,शिव और जीवन श्री प्राण ठाकुर की चौथी पीढी में थे।
श्री गोपीनाथ और शिव सगे भार्इ थे।
श्री इन्द,गौड़, श्याम, प्रयाग और दुख:हरण इनकी पांचवी पीढी में इनके पिता सगे भार्इ थे
श्री दानी,,धनराज,रामचरण और रामसेन इनकी छठी पीढभ् में हुए।
श्री रामचरण और रामसेन सगे भार्इ थे। इनके पिता धनराज के पिता सगे भार्इ थे।
इस प्रकार श्री प्राण ठाकुर के चार पौत्र में से एक के वंशज थे जीवन एक के दानी, एक के शिव और गोपीनाथ एवं चौथे वंशज शेष आठ हुए।

घनराज और धनराज सगे भार्इ थे धनराज के पुत्र नहीं थे। घनराज ने धनराज का एक पुत्र को पौष्यपुत्र लिया अपना वंश चलाया इसलिए घनराज ने कृतज्ञातावंश आदेश दिया की दोनो भार्इ के वंशज धनराज के ही कहलाऐगें।
श्री कंठ का संबंध प्राण ठाकुर से नहीं मिलता है वंशावली में भी इनका उल्लेख नहीं है। कोर्इ भी लेख प्रमाण नहीं मिलता है जिससे यह धारणा की पुष्टि हो की श्री कंठ भी प्राण ठाकुर के ही वंशज है।  { कॉपीराइट- बड़हिया डॉट कॉम © www.barahiya.com, ©बड़हिया डॉट कॉम ©www.barahiya.com }

1.चौधरी इन्द ठाकुर 2.चौधरी दानी ठाकुर 3.चौधरी शिव ठाकुर 4.चौधरी गौड़ ठाकुर
5.चौधरी प्रयाग ठाकुर 6.चौधरी दुखहरण ठाकुर 7.चौधरी रामचरण ठाकुर 8.चौधरी धनराज ठाकुर
9.चौधरी रामसेन ठाकुर 10.चौधरी गोपीनाथ ठाकुर 11.चौधरी जीवन ठाकुर 12.चौधरी श्री कंठ ठाकुर

इन सभी पूर्वजों में बाबा जीवन चौधरी की कोर्इ संतान नही था इनके बारे में किम्वदंती प्रचलित है कि-:
चौधरी जीवन ठाकुर शारीरिक शक्ति से अति बलिष्ठ थे किसी भी कार्य को अपने शक्ति से करने की क्षमता थी। इनके पटिदारों ने शक्ति के कारण हत्या का षडयंत्र रच कर तीषी के खाध में धकेल दिया तीसी से निकलने की बहुत कोशिश की पर { कॉपीराइट- बड़हिया डॉट कॉम © www.barahiya.com } जितना प्रयास किए उतना तीसी के अंदर धसते चले गए अंत में अपने को असहाय समझ पटिदारो को शाप दिया की जो मेरा हिस्सा लेगा तथा उसपर वाश करेगा वह मेरे तरह वंशहीन रहेगा और इस तरह उनका शाप दिधवे वंशीय आज भी मान रहे है।

इस तरह बड़हिया कुल बारह टोलो का नगर है हमसब टोला कहने से पहले बाबा कहते है क्योकि बारह टोलों का नाम हमसबो के पूर्वजो का ही नाम है। इस तरह बाबा जीवन की निसंतान मृत्यु के कारण टोला के रूप में चौधरी श्रीकंठ की गिनती होती है।

बाबा श्री कंठ चौधरी के संबंध में एक किबदन्ती है कहा जाता है अनुमानत: बाबा जीवन ठाकुर के दु:खुद घटना के पूर्व ही स्वयं श्री कंठ चौधरी या उनके कोर्इ पूर्वज नाव का डोरी खीचते हुए गंगा के रास्ते से बड़हिया आये बड़ी गरीब हालत में और ऐसा कहकर परिचय दिया की वे भी बड़हिया के ही निवासी के वंशज है । मरांची कांड में उनके पूर्वज भाग गये थे तथा गांव वालो से अपने को निर्धन निसहाय तथा सजातीय का दुखरा सुनाया और निवास करने की इच्छा व्यक्त की तो उन्हें यहां रख लिया गया वर्तमान में इनके वंशज इस कथन को सच नहीं मानते है { कॉपीराइट- बड़हिया डॉट कॉम © www.barahiya.com, ©बड़हिया डॉट कॉम ©www.barahiya.com }और अपने को प्राण ठाकुर का ही वंशज बताते है परंतु इनके वंशज सभी एकत्र गांव के बाहर उत्तर छोड़ पर बसे हुए है इनके खेत भी प्राय: बड़हिया टाले उत्तर छोड़ पर कोनी टाल में स्थित है।

पूर्व साक्ष्यों प्रमाणे से पता चलता है की बाबा श्री कंठ चौधरी बंशावली में कही भी नहीं आते है।

पूर्व में रामचरण चौधरी वे वंश में एक मसोमात के मृत्यु उपरांत उनकी सम्पति को लेकर दो पक्षो में दिवानी केश हुआ। सम्पति 1600 बीघा की थी। इसमें दोनो पक्षो के बाद जहां प्राण ठाकुर की वंशावली प्रस्तुत की गर्इ 13.08.1948 र्इ0 के जजमेंट पेज नं0 14 में श्री कंठ चौधरी को साक्ष्य के आधार पर प्राण ठाकुर के वंश में नही माना गया तथा प्राण ठाकुर का नजदीक गोतिया माना गया है।  { कॉपीराइट- बड़हिया डॉट कॉम © www.barahiya.com }

ग्यारह मालिको की तरह श्री कंठ की संपति भी दमामी बंदोबस्ती समय से ही है। इनका तौजी नo 19 है इनके संबंध में एक किबदंती है जो ऊपर दी गयी है जिसे आज इनके वंशज अस्वीकार करते है।

मौजूदा 12 पट्टी में श्याम की गिनती नहीं होती है पर श्री कंठ की होती है। श्याम की कोर्इ भी जायदाद कायम नहीं हुर्इ और ना तौजी संभव है कि श्री हेला ठाकुर के वंशजो की तरह दानी के भाइयों की तरह यात्री ठाकुर के वंशजों की तरह श्याम भी अपनी जायदाद मलकियत कायम नहीं कर सके हो । इनके वंशज अभी प्रयाग के साथ अपना परिचय देते है तरफ पटी श्याम नहीं कहते और नही लिखते है।
उपरोक्त बारह पुरूषो में श्यामके कुछ वंशधर अवश्य है परन्तु उनका तौजी कायम नहीं हुआ और न उनकी सम्मपति का पता चलता है । इनकी संख्या आत्यल्व कम है । यह भी एक कारण रहा होगबा किवे अलग बन्दोबस्त नहंी ले सके  { कॉपीराइट- बड़हिया डॉट कॉम © www.barahiya.com }

उपरोक्त बारह पुरूषो में से एक जीवन ठाकुर का वंश नही चला जबकि उनका तौजी महाल संपत्ति सब अलग कायम हुआ था। वंशावली के अनुसार जीवन ठाकुर नि:संतान मरे पता नहीं वे अविवाहित मरे या विधवा छोड़ गये पर चले गये नि:संतान।
इनके बारे में एक दंत कथा है जो ऊपर दी जा चुकी है. इनकी जायदाद ??मोशाखत फैज उल्लाह?? के नमा से मशहूर हुर्इ।
किन्तु इसके इतिहास का ठीक से पता नहीं चलता है।  { कॉपीराइट- बड़हिया डॉट कॉम © www.barahiya.com }

एक पुराने दस्तावेज से साबित होता है कि इन्द चौधरी सन 1612 र्इ0 में निवीत थे। और अन्य पिढीयो का अनुमान इनके आधार पर किया जा सकता है एक प्रचलित विश्वास है की दमामी बन्दोबस्ती 1763 जिन बारह पुरूषो के नाम से लिया गया यह प्रमाणित होता है कि अपने पूर्वजों के नाम पर उनके वंशजो ने लिया था और उनका नाम जारी रखा।  { कॉपीराइट- बड़हिया डॉट कॉम © www.barahiya.com }

इनके वंश में अलग-अलग पीढी में बारह महापुरूष हुए जिनके नाम पर यह बड़हिया का बारह टोला है.
पृथु ठाकुर के वंश का पता नहीं चलता है जिस समय मरांची कांड हुआ बड़हिया में रहे या गांव छोड़कर चले गये.

{ कॉपीराइट- बड़हिया डॉट कॉम © www.barahiya.com }

हमसे जुड़े

जरा हट के

पुराने समाचार यहाँ देखें