श्री शेषनाग मंदिर बभनगावाँ

श्री शेषनाग मंदिर एक परिचय

बभनगावाँ, लखीसराय (बिहार)

श्री शेषनाग की स्थापना कई सौ साल पूर्व बभनगावाँ गाँव के पशिचम में की गयी. ऐसी आस्था है की उस समय स्थापना में नाग बाबा ने इच्छा जाहिर की थी की उन्हें बभनगावाँ ग्राम जो लखीसराय समीप मनकठा के पास अवस्थित था उस गाँव के पशिचम में अवस्थित करा दिया जाय, इसी में सबका कल्याण है. बभनगावाँ गाँव वर्तमान में भी उसी जगह में उपस्थित है जो बभनगावाँ ग्राम लखीसराय के निकट मनकठा रेलवे स्टेशन से २ किलोमीटर पशिचम में है. इस गाँव की आबादी लगभग 5000 है तथा विभिन्न टोला में विभक्त है. इस गाँव का कृषि उत्पादन योग्य जमीं का कुल रकवा लगभग 8500 एकड़ है.

लोग श्री शेषनाग की असीम कृपा से ही इस गाँव में रह रहे है. इतिहास इस बात का गवाह है की गाँव का कोई भी व्यक्ति शार्प काटने से आज तक मृत नहीं हुआ है एवम नाग बाबा की पूजा करने से मन की इक्षा पूरी होती है और तन भी निरोग रहता है कोई भी मांगलिक क्रय से पूर्व श्री शेषनाग की पूजा की जाती है तथा सावन के चतुर्थी के दिन अनुनय विनय करने के उपरांत नाग बाबा प्रकट होकर दो कपटी में दुध लावा ग्रहण कर ग्राम के उपज के भविष्य का संकेत देते है.अगर दोनों कपटी उलटी हुई पी जाती है तो ऐसी मान्यता है की इस साल उपज बहुत अच्छी होगी एवम सुख समृधि होगी. अगर एक कपटी उलटी हुई पाई गयी तो उस साल फसल औसतन मानी जाती है. अगर दोनों कपटी सीधी रहती है तो सुखार के लक्षण माना जाता है. इस तरह भविष्य की जानकारी देकर ग्रामीणों को आगाह कर देते है. इससे किसान अपने आने वाले समय की योजना बना सकते है एवम सुखी सम्पन्न रह सकते है. श्री शेषनाग की कृपा सब पर बनी रहे यही कामना है.

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