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घर तबाह, शिविरों में ढूंढ रहे सुकून

ओडिशा: ओडिशा में फेलिन तूफान से तबाह हजारों घरों के लोगों ने राहत शिविरों को ही अपना दूसरा घर मान लिया है। सबसे ज्यादा प्रभावित गंजाम जिले में वापस लौटे लोगों को अपने आशियाने की जगह खंडहर मिले थे। लेकिन अपनी व अपनों की सलामती का संतोष लिए हजारों पीड़ित राहत शिविरों में सुकून ढूंढ रहे हैं। दक्षिणी ओडिशा के सबसे बड़े शहर बरहामपुर की हालत किसी युद्ध के मैदान की तरह दिखती है, चारों ओर तूफान की तबाही का मंजर फैला है।1गंजाम के शिविर में शरण लिए बीजू बहेरा ने बताया कि ‘यह राहत शिविर ही हमारा दूसरा घर है। हर बार चक्रवात आता है और हम यहां आ जाते हैं।’ 47 वर्षीय इस पीड़ित के शब्द प्रदेश के तटीय इलाकों में बसे ग्रामीणों की स्थिति बखूबी बयां करते हैं। उसका कहना है कि हमारी जान तो सरकार बचा लेती है, लेकिन हमारे पालतू जानवर प्रकृति के भरोसे रहते हैं। इससे पहले वर्ष 1999 में आए चक्रवात ने भी भारी तबाही मचाई थी। बीजू ने बताया कि हमने किसी तरह फिर अपनी दुनिया शुरू की थी, लेकिन उजड़ गई। गोपालपुर गांव के मुखिया प्रसाद राउत्रे ने बताया कि लोग अपने जीवन में एक-आध बार चक्रवात का सामना करते हैं, लेकिन हम अक्सर इसकी चपेट में आ जाते हैं। इस बार फेलिन ने तबाह किया, अगली बार कोई और होगा। एनएच-पांच के पास बने इन राहत शिविरों में करीब सौ परिवारों ने शरण ले रखी है। प्रदेश के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक भी सोमवार को शिविर के दौरे पर आए। पीड़ितों ने उनसे भोजन व पानी की अव्यवस्था को लेकर शिकायत की। इस पर मुख्यमंत्री बोले कि ‘आज सब आ जाएगा।’ उन्होंने जिला कलक्टर को सभी व्यवस्थाएं कराने के निर्देश भी दिए। इससे पहले तटीय क्षेत्रों का दौरा करने जा रहे मुख्यमंत्री का अगस्तिनौगांव के पास लोगों ने काफिला रोक लिया। उनके साथ आए गंजाम के डीआइजी अनुराग ठाकुर ने मामला शांत कराया। ग्रामीण पर्याप्त भोजन व पानी की मांग को लेकर आक्रोशित थे। 1बरहामपुर में भी फेलिन ने जमकर तबाही मचाई। यहां सरकारी विद्यायल, कार्यालय सहित कई निजी भवन जमींदोज हो गए। 50 वर्षीय व्यापारी शंकर राव ने बताया कि ‘मैंने अपने जीवन में इस तरह की तबाही नहीं देखी।’ यहां फंसे लोगों को जिला प्रशासन सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहा है। सूत्रों के अनुसार गंजाम जिले में तीन हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। जबकि प्रदेश में करीब ढाई लाख घर ढह गए। राज्य सरकार ने प्रभावित मछुआरों के लिए विशेष राहत पैकेज की घोषणा की है। इधर, आंध्रप्रदेश में भी तूफान गुजर जाने के बाद व्यापक स्तर पर बचाव अभियान चलाया जा रहा है। प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र में तूफान का सबसे ज्यादा असर हुआ है। अधिकारियों के अनुसार चक्रवात से प्रभावित श्रीकाकुलम जिले में आगामी दो दिनों में स्थिति सामान्य बना ली जाएगी। पूर्व तटीय रेलवे सूत्रों के अनुसार चक्रवात के चलते हावड़ा-विशाखापत्तनम रेलमार्ग पर सेवाएं बाधित रही हैं।

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